कृषि क्षेत्र के विकास में छ.ग. शासन का योगदान
डॉ. पदमा सोमनाथे
सहा. प्राध्यापक, वाणिज्य, गुरुकुल महिला महाविद्यालय, रायपुर (छ.ग.)
*Corresponding Author E-mail:
ABSTRACT:
’’कृषि क्षेत्र किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी मानी जाती है क्योंकि कृषि क्षेत्र। हमारी राष्ट्रीय आय का प्रमुख स्रोत है। कृषि क्षेत्र खाद्यान्न और कच्ची सामग्री उपलब्ध कराता है एवं साथ ही साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करता है।
छत्तीसगढ़ राज्य की 80ः से अधिक जनसंख्या कृषि एवं कृषि आधारित उद्योगों पर निर्भर है। छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति के कारण ही उसे धान का कटोरा कहा जाता है। किसी क्षेत्र में फसल उत्पादन के अतिरिक्त पशुपालन, वानिकी, मत्स्य पालन भी शामिल है। इन समस्त क्षेत्रों का समावेशी योगदान छत्तीसगढ़ राज्य के आर्थिक विकास में दर्शित है। शोध अध्ययन के अंतर्गत पशुपालन, कृषि फसल, मत्स्य पालन, वानिकी का राज्य के घरेलू उत्पाद में योगदान एवं शासन द्वारा कृषि क्षेत्र के विकास हेतु योजनाएं एवं कृषि क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं का अध्ययन किया गया है।’’
KEYWORDS: कृषि विकास, शासन, योगदान ।
प्रस्तावना:
भारतीय अर्थव्यवस्था पूर्णता कृषि प्रधान है। मध्य प्रदेश से पृथक होने के पश्चात 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ। राज्य निर्माण के साथ ही कृषि की उत्पादकता में वृद्धि हेतु आवश्यक संरचना, बीज केंद्र, प्रशिक्षण केंद्रों एवं कई महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किया जा रहा है। इन किसी विकास कार्यक्रमों को सर्वाेच्च प्राथमिकता से फल स्वरुप कृषि विकास राज्य में संभव हुआ। किसी से ही विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चा माल प्राप्त होता है, सूती पटसन, वस्त्र उद्योग, चीनी, बागान, वनस्पति उद्योग पूर्णता कृषि पर निर्भर है। हथकरघा, बुनाई, जैसे कई लघु एवं कुटीर उद्योग कृषि पर आधारित है।
राज्य में कृषि के विकास के फलस्वरुप ही इसी से जुड़े उद्योगों का काफी विकास हुआ है जिस हेतु शासन प्रतिवर्ष बाहर में प्रावधान इस प्रकार किसी क्षेत्र ने छत्तीसगढ़ राज्य के आर्थिक विकास में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से अपना योगदान दर्षित किया है।
शोध अध्ययन के उद्देश्य:
1ण् छत्तीसगढ़ राज्य शासन द्वारा कृषि विकास हेतु योजनाओं का अध्ययन।
2ण् छत्तीसगढ़ राज्य के आर्थिक विकास में कृषि क्षेत्र के योगदान का अध्ययन।
3ण् छत्तीसगढ़ राज्य के विकास में कृषि, वानिकी, मत्स्य पालन, के योगदान का अध्ययन।
शोध प्रविधि:
शोध पूर्ण रूप से द्वितीयक समंको पर आधारित है।
शोध परिकल्पनाएं:
छत्तीसगढ़ शासन में कृषि को के आर्थिक सुदृढ़ीकरण एवं हिस्सेदारी को बढ़ावा देने हेतु अनेक योजनाओं का संचालन कर रही है।
कृषकों की स्थिति में पूर्व की तुलना में सुधार आया है और वे राज्य की आर्थिक प्रगति में अपना योगदान दे रहे हैं। कृषि विकास कार्यक्रमों के संचालन में पूर्व की तुलना में गति आई है।
छत्तीसगढ़ राज्य के आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण साधन कृषि एवं उन पर आधारित उद्योगों को माना जा सकता है।
छत्तीसगढ़ में कृषि की स्थिति:
छत्तीसगढ़ में 47.46 लाख कृषक परिवार हैं जिनमें 76ः लघु एवं सीमांत कृषकों की श्रेणी में आते हैं। छत्तीसगढ़ के कुल क्षेत्रफल का 56.24 लाख हेक्टेयर भाग में कृषि कार्य किया जाता है।
छत्तीसगढ़ में तीन कृषि जलवायु क्षेत्र हैंः -
(1) छत्तीसगढ़ का मैदान:
छत्तीसगढ़ का लगभग 50ः क्षेत्र मैदानी है। इस क्षेत्र में दूर फसली कृषि होती है इसलिए कृषि की दृष्टि से अधिक विकसित क्षेत्र माना जाता है, मुख्य रूप से गेहूं, अलसी, सरसों, तिल, मूंगफली, अरहर, धान फसलों का उत्पादन क्षेत्र में होता है।
(2) उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र:
छत्तीसगढ़ को कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 20.86 क्षेत्र है। उत्तरी भाग में स्थित इस क्षेत्र में गन्ना सब्जियों, फल, मसालों तथा मुख्यता भगवान की फसलों का उत्पादन होता है।
(3) दंडकारण्य का पठार:
छत्तीसगढ़ के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 28.62 क्षेत्र पठार है। यह मोटे अनाज कोदो, कुटकी, रागी, मक्का आदि का उत्पादन अधिक होता है।
छत्तीसगढ़ शासन की कृषि संबंधी योजनाओं के नए प्रावधान:
ऽ राजीव गांधी किसान न्याय योजना:
केंद्र शासन द्वारा धान के बोनस वितरण के साथ समर्थन मूल्य पर उचित लाभ हेतु योजना को प्रारंभ किया गया, योजना का लाभ 2019-20 से दिया जाएगा। इस हेतु 5 हजार 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया।
ऽ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना:
इस योजना में केंद्र एवं राज्य शासन के अनुदान का अनुपात 60ः40 है। सत्र 2020-21 में इस योजना हेतु शासन से 366 करोड़ों रुपये का प्रावधान किया गया है।
ऽ अन्य प्रावधान:
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना 370 करोड़
एकीकृत बागवानी मिशन 205 करोड़
जैविक खेती मिशन 20 करोड़
वाटर शेड प्रबंधन कार्यक्रम 200 करोड़
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 110 करोड़
1ण् कृषक जीवन ज्योति योजना:
5 एचपी तक कृषि पंप निशुल्क विद्युत प्रदान किया जाएगा। 2164 करोड़ की छूट,
5,26,000 के कृषक को प्राप्त, 2 हजार 300 करोड़ का प्रावधान किया है।
2. गोठान समिति:
सुराजी ग्राम योजना अंतर्गत नरवा, गरवा, गुरुवा और बाडी योजना अंतर्गत गौंठानों के संचालन हेतु गठान समितियों को प्रतिमा 10000 अनुदान तथा पशुओं के चारे के लिए धान के पहले की व्यवस्था एवं रखरखाव को सरल बनाने हेतु चौकोर क्रय करने नवीन मद से 6 करोड़ का प्रावधान।
3. उद्यानिकी महाविद्यालय:
बेमेतरा जसपुर धमतरी बालोद में नवीन प्रजाति की सब्जी एवं फल उगाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा लोरमी में कृषि महाविद्यालय की स्थापना हेतु नवीन मद में 5 करोड़ का प्रावधान है।
4. डेयरी डिप्लोमा महाविद्यालय:
बेमेतरा व तखतपुर में डेयरी महाविद्यालय खोलने हेतु 2 करोड़ का प्रावधान।
5. फिशरीज पॉलिटेक्निक कॉलेज:
मछली पालन के क्षेत्र में राजपुर धमधा, जिला दुर्ग जिसमें नवीन अन्वेषण तकनीक से मछली पालन सिखाया जाएगा।
6. सिंचित सिंचाई क्षेत्र क्षमता:
वास्तविक सिंचित सिंचित क्षेत्र 13 लाख हेक्टेयर को वर्ष 2028 तक 32 लाख़ हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य, पैरी, महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना हेतु 20 करोड नाबार्ड सहायता से सिंचाई परियोजना हेतु 697 करोड़ महानदी परियोजना 237 करोड़, सिंचाई परियोजना 610 करोड़, एनिकट स्टॉप डेम 173 करोड क्षेत्र में सिंचाई पूर्ति हेतु 116 करोड का प्रावधान।
निष्कर्षः-
कृषि के साथ पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से जुड़े हुए हैं इस क्षेत्र की उन्नति के बिना राज्य के विकास का स्वप्न पूरा नहीं हो सकता।
कृषि विकास को बढ़ाने एवं कृषकों की आय का वर्ष 2022 तक दोगुनी करने हेतु केंद्र एवं राज्य शासन ने ना केवल विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन किया बल्कि इसी क्रम में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा पर भी कार्य किया। इन्हीं प्रयत्नों के फलस्वरुप कृषि के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।
राज्य में कृषि उपलब्धियों पर एक नजर डालने से यह स्पष्ट हो जाएगा कि शासन खाद्यान्न के प्रयास बहुत हद तक सफल हो रही है। खाद्यान्न उत्पादन 9833935 मेट्रिक टन, दलहन उत्पादन 651.34 हजार मैट्रिक टन, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य उत्पादन 2.90 लाख मैट्रिक टन रहा।
इन उपलब्धियों को प्राप्त करने का श्रेय कृषक, कृषि वैज्ञानिक एवं शासन की योजनाओं को दिया जाएगा जिनके सामूहिक प्रयत्नों से कृषि क्षेत्र में संभावनाओं एवं सफलताओं को हासिल करना संभव हो सका।
राज्य के सकल घरेलू उत्पादन में कृषि क्षेत्र का योगदान 16.81ः फसल क्षेत्र का 10.19 प्रतिशत, पशुपालन क्षेत्र का 1ण्63ः रहा है। (आर्थिक सर्वेक्षण छत्तीसगढ़ शासन 2019-20)
संदर्भ ग्रंथ सूची:
1ण् छत्तीसगढ़ आर्थिक सर्वेक्षण प्रतिवेदन वर्ष 2019-20
2ण् दैनिक भास्कर समाचार पत्र
3ण् निरंजन, प्रदीप कुमार, 2002 कृषि विकास के स्तर एक भौगोलिक अध्ययन
4ण् कृषि विज्ञान केंद्र - रायपुर (छत्तीसगढ़)
5ण् कुरुक्षेत्र - फरवरी 2019
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Received on 23.09.2021 Modified on 21.10.2021 Accepted on 18.11.2021 © A&V Publication all right reserved Int. J. Ad. Social Sciences. 2021; 9(3):129-132.
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